अखंड प्रवाहिनी
Monday, April 14, 2008
Dear Readers,I am no more writing in this blog. All my posts you will be able to read here on this blog
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REWA SMRITI.
Regards,
Rewa Smriti.
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Posted by रेवा स्मृति (Rewa) ::
8:14 AM ::
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Saturday, March 15, 2008
बार-बार क्यूँ आते हो…!
तुम आते हो,
आकर चले जाते हो,
बस यह कहकर कि
मंज़िल अपनी अलग है,
मैं पूछती हूँ तुमसे
इसबार बता दो,
तुम आख़िर लौट कर
बार-बार क्यूँ आते हो?
इतना जानती हूँ,
तुम ख़ुद को
नही संभाल पाओगे,
ना मिलूंगी तो,
वक़्त के चंगुल में फस
बेचैन हो जाओगे!
यह कैसा पागलपन है,
सपने इस दिल में बुन
ख़ुद ही तोड़ते हो,
फिर चिल्लाते हो
मुझे ना रोको,
मान लो इसबार
बस एकबार,
आलिंगन कर लेने दो!
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Posted by रेवा स्मृति (Rewa) ::
10:03 PM ::
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Wednesday, June 14, 2006
मुझसे दोस्ती करोगे!
आसमानो में,
उड़ते हुए पक्षियों से,
मैने पूछा-
क्या तुममे से कोई,
मुझसे दोस्ती करोगे!
सबकी सब,
भीड़ मे उड़ती,
आसमानो को छूती,
मडराती हुई,
बिना सवालों का उत्तर दिए,
चले गई!
अपने आशाओं को,
टूटते देख,
मैं निराश,
सिर झुकाए,
घर के छत पर,
खड़ी रही!
अनायास,
उनमे से एक,
मीठी सी मुस्कान,
मुख पर लिए,
मेरे पास आकर,
मेरे कंधों पर बैठ,
मुझसे पूछी-
मेरी दोस्त बनोगी?
मेरे मौनरहित,
उत्तर पाकर,
रोज आती,
मेरे कंधों पर बैठ,
मेरे खुशी को देखती,
वो हस्ती, मुस्कुराती
फिर उड़ जाती,
बहुत दूर....
आसमानो की ओर,
उसे छूने की चाहत,
दिल में लिए!
Posted by रेवा स्मृति (Rewa) ::
4:43 PM ::
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